शब्द तो ध्वनि हैं, अर्थ की सीढ़ी चढ़े हुए,
ये वक्त की धार पर निर्बाध (unobstructed) बहते हैं।
खुशी और ग़म बस प्रयोग का अंतर है इनमें
ये रंग वही ओढ़ते हैं, जो मन इन्हें कहता है।
ये पीड़ा की अग्नि हैं, अशांत आत्मा को जलाने वाले,
और मरहम की शीतल ओस, घावों को सुलझाने वाले।
निर्णायक है कि हम किस शब्द का चुनाव करें,
क्यूँकि मानव की नियति इन्हीं से बनती और बिगड़ती है।