ये कहानी पूरी तरह से काल्पनिक हैं , ये कहानी हमारे समाज में हो रही ऐसी कुप्रथा - दहेज प्रथा के संबंध में लिखा जा रहा है , हमारे यहां ना एक कहावत बहुत ही मशहूर है , एक बार बेटी की डोली उसके मायके से उठ गई तो अब चाहे जिस हाल में भी रहें लेकिन उसकी अर्थी उसके ससुराल से ही उठनी चाहिए , बहुत सोचने के बाद मै इस विषय पर कुछ लिखने जा रही हूं , बहुत हिम्मत करके ... ये कहानी कहीं ना कहीं सच ही है और आए दिन कभी न किसी के साथ घटती ही है।