बिन मौसम बरसात
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बिन मौसम बरसात
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
आसमान भी शायद कुछ कहना चाहता, आँसू बनकर वो बहना चाहता। बे-मौसम सही, पर दिल छू जाता, हर बूंद में कोई अफ़साना बरस जाता। 🌧️
लेखक : निर्मेश
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