ये फिजाएं
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ये फिजाएं
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
ये कविता प्रकृति की उन फिजाओं की बात करती है जो मन को सुकून देती हैं, यादें जगाती हैं और दिल को प्यार से भर देती हैं।
लेखक : विजय सांगा
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