अपने शिक्षक प्रशिक्षण के प्रथम वर्ष में एक लड़की के प्रति मुझे आकर्षक हुआ मग़र मैने तब तक शिवाए गायत्री जी के अन्य किसी को भी कविता में सहेजने की नहीं सोची, ये पहली बार था अब किसी लड़की में मुझे उसके स्वयं पर कविता लिखने का आग्रह किया। एक मन तो था कि मैं नहीं लिखूं, लेकिन एक तो यह पहली बार था और दूसरा उसके प्रति मेरा कुछ आकर्षक भी था। अतः मैंने उनके लिए ये कविता लिखी....