सुबह की चांद
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सुबह की चांद
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
नीले गगन में शीतल नूर, मानो चाँद ने छोड़ी हो धूर। फूलों पर मोती जैसे कण, उसकी याद दिलाए हर पल।
लेखक : rani
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