तेरी मुस्कान
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तेरी मुस्कान
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
तेरी मुस्कान, जैसे थकी हुई ज़िंदगी में एक नई सुबह, जो बिना कुछ कहे, सब कुछ कह जाती है।
लेखक : विजय सांगा
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