💔 घर का कैदी
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💔 घर का कैदी
कविता
कविता
घर वही तो है, जहाँ दिल को सुकून मिले, पर जब अपने ही दिल को तन्हा कर दें, तो इंसान न मर पाता है, न जी पाता है... बस रोज़ ज़िम्मेदारी निभाते-निभाते, धीरे-धीरे खुद से दूर हो जाता है...
लेखक : shadow
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