मोह
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मोह
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
मोह, एक ऐसा बंधन जो दिल को जोड़ता भी है और तोड़ता भी। जिससे मुक्ति चाहो, वही सबसे गहराई तक उतर जाता है।
लेखक : विजय सांगा
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