मिट्टी के दीये जब जलते हैं,
अंधेरों में उजाले पलते हैं।
छोटे से तन में लौ बड़ी,
हर दिल में उम्मीद जलते हैं।
ना कोई शोहरत, ना अभिमान,
बस प्रेम से करते हैं पहचान।
तेल की बूंद, बाती का साथ,
देते हैं जग को रौशनी का पाठ।
सजते हैं चौखट, मंदिर, आँगन,
बन जाते हैं हर घर का दर्पण।
हर दीप में है मिट्टी की महक,
हर लौ में माँ जैसी लचक।
जलते-जलते ये सिखा जाते,
त्याग में भी सुख दिखा जाते।
मिट्टी में मिलकर फिर खिलते,
हर बार नया दीप बन जलते।
ओ मिट्टी के प्यारे दीयों,
तुमसे ही है जीवन का भरोसा।
सादगी में छुपी है तेरी रौनक,
और तेरे संग दीपावली का जोशा। ✨