मिट्टी के दिये
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मिट्टी के दिये
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
ये कविता बताती है कि सच्ची रोशनी दिखावे में नहीं, सादगी में बसती है, जैसे मिट्टी का दिया अंधेरों में भी उम्मीद जगाता है।
लेखक : विजय सांगा
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