बदलते लोग
Added Successfully to library!
बदलते लोग
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
बदल गए लोग इस दुनिया में, अब रिश्तों में सच्चाई नहीं — सब बस दिखावे का खेल है। 💔 हर मुस्कान के पीछे अब मुखौटा है, कोई किसी का नहीं रहा इस ज़माने
लेखक : Shekhar Abhash
Add To Library
8
Views
5
Ratings
1 Min
Duration
लाइब्रेरी
श्रेणी
लिखे
अपडेट
शॉप