बदलते लोग
Added Successfully to library!
बदलते लोग
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
ये कविता दिखाती है कि कैसे समय के साथ लोग और उनके रिश्तों के मायने बदल जाते हैं, जो कभी अपने थे, अब वही अजनबी लगने लगते हैं।
: विजय सांगा
Add To Library
14
Views
5
Ratings
1 Min
Duration
लाइब्रेरी
श्रेणी
लिखे
अपडेट
शॉप