“साथ” विवेक और दिव्या की उस कहानी का नाम है जहाँ मुलाक़ातें इत्तेफ़ाक़ थीं, जुदाइयाँ ज़रूरी थीं, और लौट आना किस्मत। यह प्यार की नहीं, एहसास की दास्तान है। जहाँ शब्द कम थे, पर दिल बहुत बोले। आखिर में, उन्होंने पाया कि साथ सिर्फ़ पास रहना नहीं दिल से जुड़े रहना है।