जोकर
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जोकर
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
जिसकी मुस्कान में लिपटी है तन्हाई की लहर। दुनिया जिसे तमाशा समझती रही हर घड़ी, दरअसल, वो तो खुद ही अपनी टूटी रूह का कलाकार ठहरा।
लेखक : Geet ka safar ✍️
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