मां का हृदय दुनिया का सबसे कोमल स्थान है।
वह अपनी संतान के लिए जीती है, रोती है, हंसती है और सबसे बड़ा सुख उसे तब मिलता है, जब उसका बच्चा मुस्कुराता है। उस मुस्कान में उसे सृष्टि की पूर्णता दिखती है, उस पल भर में वर्षो की थकान मिट जाती है, और जीवन का अर्थ समझ में आता है।
यह कविता “जब तुम मुस्कुराते हो” । एक मां की उन्हीं भावनाओं का चित्रण है।
यह सिर्फ़ मां और बच्चे का संबंध नहीं, बल्कि सृष्टि और सृजन का संवाद है कि जब बच्चा मुस्कुराता है ,तो वह मुस्कान सिर्फ़ होंठों की नहीं, बल्कि मां के अस्तित्व की धड़कन बन जाती है।