बदसूरत।
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बदसूरत।
दैनिक प्रतियोगिता
छोटी कहानियां
वो खूबसूरत थी, पर खुद को बदसूरत बनाकर जी रही थी… वो सबकुछ रखता था, पर अंदर से खाली था। एक अनजानी मुलाकात, कुछ अनकहे जज़्बात, और एक ऐसा राज़ जो सबकुछ बदल देगा… “बदसूरत” — जब चेहरे नहीं, दिल टकराते हैं।
लेखक : Jashan
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