अखबार
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दैनिक प्रतियोगिता
कविता
अख़बार वो आईना है, जो समाज की हर सच्चाई दिखाता है। हर सुबह नई कहानी के साथ हमें सोचने पर मजबूर कर जाता है।
लेखक : विजय सांगा
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