कवि केवल शब्दों का बुनकर नहीं होता,
वह उन भावनाओं का शिल्पी होता है जिन्हें दुनिया महसूस तो करती है, पर कह नहीं पाती।
उसकी कलम, उसकी आत्मा की सांस होती है।
जो हर दर्द, हर प्रेम, हर सन्नाटे को आवाज़ बनती है।
कभी वो सत्य का दर्पण बुनता है,
तो कभी संवेदनाओं का मंदिर।
यह कविता उसी कवि के मन, उसकी सोच और उसकी अमर कलम की यात्रा है।
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