पर्वत की सीख
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पर्वत की सीख
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
धूप पड़े या छाए बादल, मैं न कभी डगमग होता हूँ। ठंडी बर्फ़ की चादर ओढ़े, फिर भी ऊँचा खड़ा रहता हूँ।
लेखक : Writer Dev
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