पर्वत की सीख

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पर्वत की सीख


धूप पड़े या छाए बादल, मैं न कभी डगमग होता हूँ। ठंडी बर्फ़ की चादर ओढ़े, फिर भी ऊँचा खड़ा रहता हूँ।

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