पर्वत की सीख
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पर्वत की सीख
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
धूप वहाँ भी मुस्काती है, पर ठंडक उसकी अपनी है। सहनशीलता की मिसाल वो, धरती की गोद में रत्न जमीं है।
लेखक : rani
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