पापा की छाया
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पापा की छाया
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
हर बेटी के जीवन में पिता सिर्फ एक नाम नहीं, एक सुरक्षा का आकाश होते हैं। उनकी छांव में हर दर्द हल्का लगता है, हर डर पिघल जाता है। “पापा की छाया” उसी मौन प्रेम की कहानी है , जो शब्दों से नहीं, एहसासों से जी जाती है।
लेखक : Geet ka safar ✍️
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