चाँदनी रात में जादू बिखरा,
हर दिल में एक ख्वाब सजा।
ठंडी हवा जब गालों को छूती,
मन जैसे कोई गीत रचा।
तारे झिलमिल करते नभ में,
जैसे कोई मेले का रंग जमा।
नदियों पर चाँद का प्रतिबिंब,
जैसे सोना बिखरा जल में सजा।
पेड़ों की शाखें हौले झूमें,
चाँद की किरणों से हों सजा।
नींद भी आती मीठी-मीठी,
जब चाँद करे आँखों से दुलार।
दूर कहीं बंसी की धुन बजे,
लगता जैसे प्रेम का पुकार।
हर कोना रौशन, हर छाया प्यारी,
जैसे रात ने ओढ़ी उजली साड़ी।
झील के पानी में लहरें बोले,
"कितनी सुंदर ये चाँदनी रात!"
जुगनू भी बनते साथी उसके,
जब धरती पे उतर आए सौगात।
मन में उठे सौ भाव अनोखे,
हर ख्वाहिश ले उड़ान रात भर।
चाँद जैसे मुस्काए नभ में,
फैला दे शीतलता हर घर।
पर्वत की चोटी पे चमके उजियारा,
जैसे कोई दीप जले मन का प्यारा।
बागों में फूल भी महक उठे,
चाँदनी से नहाए सारे किनारे।
प्रेमी जोड़े करें बातें चुपचाप,
हवा सुनाए उनके इशारे।
सन्नाटा भी लगे मधुर गान,
इस रात में सब कुछ सुहावन।
श्वेता अग्रवाल ✍️✍️🍁❤️🔥