चांदनी रात
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चांदनी रात
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
ठंडी-ठंडी हवा संग, बयार बहती जाती है, हर पत्ते की सरसराहट में, कोई धुन सुनाई देती है।
लेखक : Writer Dev
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