🇮🇳 देश की स्वैच्छिक सेवा 🇮🇳
न कुछ चाहो, न कुछ मांगो,
बस सेवा में मन लगाओ।
देश की माटी का ऋण चुकाने,
जीवन को अर्थ बनाओ।
जहाँ ज़रूरत हो मुस्कानों की,
वहाँ बनो तुम उजियारा।
किसी के आँसू पोंछ सको तो,
यही है कर्म हमारा।
न पद का लोभ, न नाम की चाह,
बस निस्वार्थ भावना रखो।
सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है,
इसमें अपना जीवन ढको।
कूड़े में फूल खिलाना सीखो,
अंधेरों में दीया जलाओ।
हर गाँव में ज्ञान बाँटते चलो,
अज्ञान का पर्दा हटाओ।
जो देशभक्त स्वैच्छिक बनते,
उनसे जग को राह मिलती है।
उनके कर्मों की स्याही से,
हर सुबह नई खिलती है।
चलो कदम उस राह पे सब,
जहाँ कर्तव्य ही पूजा है।
स्वैच्छिक सेवा की भावना,
भारत की सच्ची दूजा है। 🇮🇳
श्वेता अग्रवाल 🔥🔥✍️