He was cold. Arrogant. Untouchable.
जिससे लोग डरते थे… और जिस तक पहुँचना नामुमकिन था।
और वो?
एकदम उलट। मासूम सी, लेकिन दिल से बग़ावती।
जो रिश्तों को निभाना जानती थी, लेकिन किसी की ज़िद के आगे झुकना नहीं।
एक अचानक तय हुई सगाई…
एक ऐसा बंधन, जो किसी ने चाहा नहीं—लेकिन किस्मत ने लिखा।
वो उसे "इज्ज़त" समझता था,
वो इसे "ज़िम्मेदारी" मानती थी।
लेकिन जब नज़रें टकराईं और दिल धड़का…
तो ये रिश्ता बस नाम का रह गया, एहसास कहीं गहराई में जन्म लेने लगा।
🔥 क्या ये कहानी नफ़रत से मोहब्बत तक पहुँचेगी…
या फिर अहंकार और जिद इसे अधूरा छोड़ देंगे? 🔥