स्पर्श में है जादू कोई,
बिन कहे कह जाता है।
मौन अधरों की भाषा बनकर,
हर भावना छू जाता है।
माँ के हाथों का स्पर्श सुनहरा,
सारे दुख हर जाता है।
पिता के कंधे का स्पर्श गहरा,
हौसला जगाता है।
दोस्ती के हाथ का स्पर्श सच्चा,
हर अकेलापन मिटाता है।
प्रेम में छुपा स्पर्श अनोखा,
दिल से दिल मिल जाता है।
बच्चे की नन्ही उंगलियों का स्पर्श,
सपनों को जीता है।
प्रकृति की ठंडी हवा का स्पर्श,
मन को शीतल कर जाता है।
बारिश की बूंदों का स्पर्श नर्म,
दिल को गीत सुनाता है।
दर्द में भी मिलता है सुकून,
जब कोई हाथ थाम लेता है।
स्पर्श में बसी है वो गर्माहट,
जो टूटे मन को जोड़ देता है।
हर रिश्ता और गहरा बन जाता,
जब दिल से दिल को छू जाता है।
श्वेता अग्रवाल ✍️🍁✍️🥰❤️