मैं अपने ही पिंजरे में...
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मैं अपने ही पिंजरे में...
कविता
मेरी डायरी
मैं अपने ही पिंजरे में कैद हूँ, जहाँ मेरी ही सोच और डर मुझे बाँध लेते हैं… बाहर निकलने की चाह तो है, पर हिम्मत की डोर अभी कमज़ोर लगती है।🍂
लेखक : Srushti
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