यह कहानी रामेश्वर नामक एक साधारण दुकानदार की है, जो कठिन परिस्थितियों और लालच के बावजूद ईमानदारी नहीं छोड़ता। बेटे की जान पर संकट आने के बावजूद वह सत्य और नैतिकता पर अडिग रहता है। अंतत उसकी ईमानदारी समाज को प्रेरित करती है और उसे वास्तविक सम्मान और सफलता मिलती है।