रोशनी
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रोशनी
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
अब किसी बाहरी रोशनी की जरूरत नहीं, मेरी रोशनी मेरे अन्दर मौजूद है।
लेखक : तृप्ति सिंह
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