खामोशी भी एक भाषा होती है,
दिल की गहराइयों की परिभाषा होती है।
कभी ये सुकून सा असर छोड़ जाती है,
तो कभी आँसूओं को रास्ता दिखाती है।
शब्दों से ज्यादा गहरी लगती है ये,
हर अधूरी दुआ को कहती है ये।
कभी मोहब्बत का इज़हार बन जाती है,
तो कभी दर्द की दीवार बन जाती है।
सवाल भी करती है, जवाब भी देती है,
दिल की बेचैनी को बेहिसाब कहती है।
नज़रों की खामोशी बहुत कुछ समझाती है,
रिश्तों की सच्चाई भी यही बताती है।
ये चुप्पी कई तूफ़ानों को छुपा लेती है,
टूटे हुए दिल को भी संभाल लेती है।
कभी ग़म की बारिश सा असर करती है,
तो कभी उम्मीद की किरण बन चमकती है।
खामोशी को बस महसूस करना आना चाहिए,
ये हर हालात का आईना दिखा जाती है।
श्वेता अग्रवाल ✍️🍁