एक ख्वाब का उजास लिखा है,
तेरी हँसी से जगमगाती उन बारातों में।
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दो रूहों ने साथ चलना सीखा,
सदियों से बिखरी मोहब्बत की मुलाक़ातों में।
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तीन साँसों का चैन मिला है,
अधूरी दुआओं से भरी उन तनहा रातों में।
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चार दिशाओं ने सुर मिलाए,
आसमान तक गूंजती प्रीत की सौग़ातों में।
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और सत्य ने जब स्वर साधा,
गूँज उठा मन हर अनकही बातों में।
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पलकों ने जब सपना बुन डाला,
बरस पड़ा स्नेह अमृत की बरसातों में।
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एक "मैं" और "तू" का संगम बसा,
अनंत यात्रा ठहर गई जीवन की सौगातों में।