स्वच्छता का संकल्प ✊
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स्वच्छता का संकल्प ✊
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
आग, धुएं और गंदगी से कराह रही है ये धरा, मानव के स्वार्थ ने उसका आँचल ही जला डाला। माँ रो रही है अपने ही बच्चों के पापों से, अब स्वच्छता ही है उसका अंतिम सहारा।।
लेखक : Geet ka safar ✍️
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