यह कहानी भारत के एक छोटे से गाँव के किसान रामेश्वर की है, जो अपने खेतों में दिन-रात मेहनत करता है लेकिन कर्ज़ के बोझ तले दबा रहता है। मौसम की मार, बिचौलियों का शोषण और महंगे बीज-खाद के कारण उसका जीवन लगातार कठिन होता जाता है। अपनी पत्नी और बच्चों की ज़िम्मेदारियों के बीच वह संघर्ष करता है, कभी हार नहीं मानता और उम्मीद की रोशनी खोजता है।
यह कहानी केवल रामेश्वर की नहीं, बल्कि उन लाखों किसानों की आवाज़ है जो हर दिन सपनों और कर्ज़ के बीच पिसते हैं। इसमें परिवार की पीड़ा, गाँव का सामाजिक ताना-बाना, और किसान की जिजीविषा (जीने की जिद) को गहराई से चित्रित किया गया है।
लेखक जशन ने इस कथा में किसानों की असलियत, उनकी चुनौतियों और उनके भीतर छिपे साहस को सामने लाने की कोशिश की है, ताकि पाठक समझ सकें कि “अन्नदाता” का जीवन केवल खेतों की हरियाली नहीं, बल्कि संघर्षों का लंबा सफर भी है।