नाकामियों पर हँस रही है दुनिया ( स

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नाकामियों पर हँस रही है दुनिया ( स


समाधान की सुबह है, मेरे अंदर ही जागी, जबसे मैंने अपनी लगन, सच्ची है लागी। हँसी को इनकी मैं, अपनी ताक़त बनाऊँगी, हर एक ताने का बदला, सफल होकर चुकाऊँगी। जो आज मुझपे हँसते हैं, कल तालियाँ बजाएँगे, मेरी कहानी सुनकर, अपने बच्चों को सुनाएँगे। कि एक थी जो गिरी थी, पर गिरकर न रुकी कभी, जिसकी नाकामियों पर हँसी थी दुनिया, पर वो झुकी नहीं कभी
लेखक : Erica

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