क़िस्मत का खेल

client-img

क़िस्मत का खेल


यह कहानी प्रीता नाम की एक साधारण ग्रामीण लड़की के जीवन के संघर्ष और विजय की मार्मिक गाथा है। प्रीता, जिसे न तो बाहरी सुंदरता मिली है और न ही पढ़ाई में कोई विशेष चमक, अक्सर खुद को समाज में अकेला और कमतर महसूस करती है। बचपन से ही लोग, यहां तक कि रिश्तेदार भी, उसका मज़ाक उड़ाते हैं और उसे "बोझ" समझते हैं, जिससे उसका आत्म-विश्वास डगमगा जाता है। एक घटना में लड़कों द्वारा छेड़खानी का सामना करने के बाद, वह अपनी नियति पर सवाल उठाती है और खुद को आईने में देखकर रोती है, यह सोचकर कि उसे इस दुनिया में क्यों भेजा गया। ​हालांकि, प्रीता के माता-पिता - सुरेश और सुमित्रा - उसके सबसे बड़े समर्थक हैं। उनकी निस्वार्थ प्रेम और अटूट विश्वास प्रीता को हिम्मत देता है। माँ उसे सिखाती है कि उसका असली मूल्य उसके दिल और ईमानदारी में है, न कि लोगों की बातों में। पिता उसे स्कूल छोड़ने और लेने जाते हैं, जिससे उसे सुरक्षा का एहसास होता है। ​कहानी में एक मोड़ तब आता है जब प्रीता अपनी पाक-कला के प्रति अपने गहरे लगाव और हुनर को पहचानती है। उसे खाना बनाने और नए-नए व्यंजन आज़माने में खुशी मिलती है, और उसके हाथ का बना खाना सभी को बेहद पसंद आता है। दुनिया के ठुकराए जाने के बाद, वह अपनी इस खूबी को अपनी ताकत बनाने का फैसला करती है। माता-पिता के सहयोग से, प्रीता एक छोटी सी ठेली पर "प्रीता की रसोई" नामक अपना व्यवसाय शुरू करने का साहसिक कदम उठाती है। शुरुआती निराशा और लोगों की उपेक्षा के बावजूद, उसकी पहली आलू टिक्की चाट एक बुजुर्ग ग्राहक को पसंद आती है, जो उसे आत्मविश्वास की पहली खुराक देती है। यह कहानी प्रीता के आत्म-खोज, प्रतिकूलताओं पर विजय और अपने हुनर के माध्यम से अपनी पहचान बनाने के भावनात्मक सफर को दर्शाती है।
: Manisha devi

7

Views

5

Ratings

12 Min

Duration


  • लाइब्रेरी

  • श्रेणी

  • लिखे

  • अपडेट

  • शॉप