रात हमेशा से इस शहर में लंबी लगती थी…लेकिन पिछले कुछ दिनों से, जैसे वो और भी लंबी हो गई थी। जैसे आसमान ने तय कर लिया हो कि सुबह को आने नहीं देना।
शहर का नाम था कन्या नगर, पुराना, लगभग भुला दिया गया कस्बा, जो एक सूखे जंगल और टूटे-फूटे पहाड़ों के बीच छुपा हुआ था। यहाँ के घर लकड़ी और पत्थर के बने थे, जिन पर वक्त के निशान साफ़ दिखते थे टूटी खिड़कियों के शीशे, जंग लगे दरवाज़े, और सीलन से भरी दीवारें।