यह कहानी “भ्रष्टाचार का दीमक” एक कस्बे सत्यनगर की है, जहाँ युवा अर्जुन भ्रष्टाचार की जड़ों से टकराता है। संघर्ष, आंदोलन और बलिदान के बीच वह जनजागृति की चिंगारी बनता है। यह कथा दिखाती है कि सच्चा परिवर्तन कठिनाइयों से गुजरकर ही समाज की सोच को बदलता है।