TUM MERI SAAZA, TUM MERI WAFA

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TUM MERI SAAZA, TUM MERI WAFA


वो उसकी मोहब्बत भी थी… और उसकी नफ़रत भी। वो उसकी कमजोरी भी थी… और उसका जुनून भी। उसकी हर धड़कन में इश्क़ की प्यास थी, मगर हर साँस में इंतकाम की आग। वो उसे चाहता भी था… और सज़ा देना भी चाहता था। क्या उनका इश्क़ नफ़रत पर जीत पाएगा? या फिर मोहब्बत ही उनकी सबसे बड़ी सज़ा बन जाएगी? “Tum Meri Saaza, Tum Meri Wafa” एक दास्तान – इश्क़, जुनून और इंतकाम की।
: Shekhar Abhash

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