चांद की चिट्ठी
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चांद की चिट्ठी
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
चांद ने लिखा एक ख़त, सितारों की स्याही से रात ने रखा उसे, अपनी काली बाहों में।लिखा था उसमें सपना, उजले कल की बात, प्यार से भरी दुनिया, सच्चाई की सौगात।धरती से पूछा चांद ने, क्यों इतना शोर है, मनुष्यों के मन में, इतना क्यों ज़हर है।
लेखक : निर्मेश
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