चाँद की चिट्ठी
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चाँद की चिट्ठी
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
"मैं रोज़ देखता हूँ तुझे दूर से, तेरी खामोशी पढ़ता हूँ नूर से। तेरे ख्वाबों में चमकता हूँ हर शाम, तेरे आँगन में बिखेरता हूँ अपना पैगाम।
लेखक : rani
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