“इंसाफ का पलड़ा” एक किसान सत्यनारायण की संघर्षगाथा है, जो अन्याय और सत्ता के अहंकार के विरुद्ध आवाज़ उठाता है। कैद, दर्द और विद्रोह की आग से गुजरते हुए वह प्रजा का नायक बनता है। अंततः वह राजा को परास्त कर न्याय और समानता पर आधारित नई व्यवस्था की नींव रखता है।