मिट्टी के घर
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मिट्टी के घर
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
मिट्टी की खुशबू हुआ करती थी मिट्टी के घर में अब मकान चाहें पक्के बन गए पर इंसानियत की खुशबू कहाँ मिलती पक्के घर में
लेखक : malwin
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