जाती की दीवारें और नवरात्रि
“जाति की दीवारें और नवरात्रि” गाँव की उस सच्चाई को उजागर करती है जहाँ त्यौहार की रौनक जातिगत भेदभाव से धुंधली हो जाती है। रामकिशन और युवाओं की पहल से यह विभाजन मिटता है। कहानी बताती है कि नवरात्रि की असली शक्ति एकता, समानता और इंसानियत में बसती है, न कि ऊँच नीच में।