टूटे दिल की आवाज़ (स्वैच्छिक)
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टूटे दिल की आवाज़ (स्वैच्छिक)
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
आँखों में थे जो सपनों के मेले, बन बैठे अब दर्द के अकेले। हँसी की जगह है सन्नाटा गहरा, दिल टूटा तो सब कुछ है सुनहरा।
: rani
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