स्वैच्छिक

client-img

स्वैच्छिक


फूल जब खिलता है, तो किसी से अनुमति नहीं माँगता। नदी जब बहती है, तो किसी नियम से बंधती नहीं। पंछी जब उड़ता है, तो आसमान उसका क़ैदख़ाना नहीं बनता। इंसान जब प्रेम करता है, तो हक़ से नहीं, दिल से करता है। यही है स्वैच्छिक जहाँ ज़बरदस्ती का नामोनिशान न हो, जहाँ कर्म बोझ न लगे, बल्कि आत्मा की मुस्कान बने।
: Anu

23

Views

5

Ratings

1

Duration


  • लाइब्रेरी

  • श्रेणी

  • लिखे

  • अपडेट

  • शॉप