ओस की बूंद
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ओस की बूंद
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
न स्वार्थ, न अभिमान, बस समर्पण, क्षणभंगुर जीवन का सत्य दर्शन। हर बूंद हमें यही समझाती, क्षण को जी लो, समय है न्यारी।
: निर्मेश
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