औंस की बूंद
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औंस की बूंद
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
क्षण भर को बस ठहर सकी, फिर हवा ने छू लिया, ना शोर किया, ना दर्द दिखाया, बस मिट गई, जैसे थी ही नहीं।
लेखक : rani
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