पेड़ की छांव
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पेड़ की छांव
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
थका यात्री आया, मिला पेड़ की छांव, जैसे जीवन में मिल गया कोई ठांव।पत्तों की सरगम, हवा का गान, मन के दुख मिटाए, करे दिल आसान।धूप से झुलसे रास्ते ठहरे वहीं, शांति समाई, जैसे रुकी हो घड़ी।
: निर्मेश
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