जब तुम कभी अपना प्रेम कहना

client-img

जब तुम कभी अपना प्रेम कहना


सुनो, जब तुम कभी अपना प्रेम कहना, तो शब्दों की भीड़ मत लगाना, बस एक सच्ची नज़र भर देख लेना... गुलाब, गहनों या तोहफ़ों की ज़रूरत नहीं, तुम्हारी ख़ामोशी भी मेरी धड़कनों को समझ लेगी। नदियों और समंदर की मिसाल मत देना, तुम्हारा नाम ही मेरे लिए एक अनंत धारा है। कहानियों में ढूंढना मत अपने प्रेम की पहचान, तुम्हारी साधारण मुस्कान ही मेरी सबसे अनमोल दास्तान है। ना भीड़ के सामने, ना दुनिया के दिखावे में, बस दो दिलों की खामोशी में, तुम कह देना "मैं तुम्हारी हूँ"। और मैं समझ जाऊँगी, कि यही प्रेम है... सच्चा, गहरा और अडिग। 🌹🌹🌹
लेखक : Anu

25

Views

5

Ratings

1

Duration


  • लाइब्रेरी

  • श्रेणी

  • लिखे

  • अपडेट

  • शॉप